श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  3.7.46 
কৃষ্ণচন্দ্র তোমার হৃদযে নিরন্তর
তোমার বিগ্রহ কৃষ্ণ-বিলাসের ঘর
कृष्णचन्द्र तोमार हृदये निरन्तर
तोमार विग्रह कृष्ण-विलासेर घर
 
 
अनुवाद
"कृष्णचन्द्र सदैव आपके हृदय में निवास करते हैं। इस प्रकार आपका शरीर कृष्ण की लीलाओं का निवास है।"
 
"Krsnachandra always resides in your heart. Thus your body is the abode of Krishna's pastimes."
तात्पर्य
श्री नित्यानंद का शरीर कृष्ण की लीलाओं का आश्रय है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)