श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  3.7.44 
তোমার মহিমা জানিবারে শক্তি কার
মূর্তিমন্ত তুমি কৃষ্ণ-রস-অবতার
तोमार महिमा जानिबारे शक्ति कार
मूर्तिमन्त तुमि कृष्ण-रस-अवतार
 
 
अनुवाद
"आपकी महिमा को जानने की शक्ति किसमें है? आप कृष्ण के प्रति प्रेम की दिव्य मधुरिमा के साक्षात स्वरूप हैं।
 
“Who has the power to understand your glory? You are the very embodiment of the divine sweetness of love for Krishna.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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