श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.7.4 
জয বক্রেশ্বর পণ্ডিতের প্রিযকারী
জয পুণ্ডরীক বিদ্যানিধি মনোহারী
जय वक्रेश्वर पण्डितेर प्रियकारी
जय पुण्डरीक विद्यानिधि मनोहारी
 
 
अनुवाद
वक्रेश्वर पंडित के उपकारक की जय हो! पुण्डरीक विद्यानिधि के जादूगर की जय हो!
 
Hail the benefactor of Vakresvara Pandita! Hail the magician of Pundarika Vidyanidhi!
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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