श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.7.33 
দুই জনে শ্লোক পডি’ বর্ণেন দুঙ্হারে
দুঙ্হারেই দুঙ্হে যোড-হস্তে নমস্করে
दुइ जने श्लोक पडि’ वर्णेन दुङ्हारे
दुङ्हारेइ दुङ्हे योड-हस्ते नमस्करे
 
 
अनुवाद
दोनों ने एक दूसरे की स्तुति में श्लोक पढ़े और फिर एक दूसरे को हाथ जोड़कर प्रणाम किया।
 
Both of them recited verses in praise of each other and then bowed to each other with folded hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)