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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ
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श्लोक 32
श्लोक
3.7.32
কি অদ্ভুত প্রীতি সে করেন দুই-জনে
পূর্বে যেন শুনিযাছি শ্রী-রাম-লক্ষ্মণে
कि अद्भुत प्रीति से करेन दुइ-जने
पूर्वे येन शुनियाछि श्री-राम-लक्ष्मणे
अनुवाद
उन दोनों के बीच प्रेम का अद्भुत आदान-प्रदान वैसा ही था जैसा पहले राम और लक्ष्मण के बीच था।
There was a wonderful exchange of love between them, just like the one between Rama and Lakshmana earlier.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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