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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ
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श्लोक 30
श्लोक
3.7.30
ক্ষণে দুই প্রভু করে প্রেম-আলিঙ্গন
ক্ষণে গলা ধরি’ করে আনন্দ-ক্রন্দন
क्षणे दुइ प्रभु करे प्रेम-आलिङ्गन
क्षणे गला धरि’ करे आनन्द-क्रन्दन
अनुवाद
एक क्षण वे प्रेम से गले मिले, और अगले ही क्षण वे एक-दूसरे की गर्दन पकड़कर रोने लगे।
One moment they embraced lovingly, and the next they were crying, clutching each other's necks.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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