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श्लोक 3.7.27  |
দেখি’ নিত্যানন্দ গৌরচন্দ্রের বদন
কি আনন্দ হৈল, তাহা না যায বর্ণন |
देखि’ नित्यानन्द गौरचन्द्रेर वदन
कि आनन्द हैल, ताहा ना याय वर्णन |
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| अनुवाद |
| श्री गौरचन्द्र का मुख देखकर नित्यानंद को जो प्रसन्नता हुई, उसका वर्णन करना कठिन है। |
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| It is difficult to describe the joy that Nityananda felt on seeing the face of Sri Gaurchandra. |
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