श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.7.26 
নিত্যানন্দ-স্বরূপো জানিঞা সেই-ক্ষণে
উঠিলেন ’হরি বলি’ পরম সম্ভ্রমে
नित्यानन्द-स्वरूपो जानिञा सेइ-क्षणे
उठिलेन ’हरि बलि’ परम सम्भ्रमे
 
 
अनुवाद
उस समय नित्यानंद बड़ी श्रद्धा से उठकर “हरि! हरि!” का जाप करने लगे।
 
At that time Nityananda stood up with great devotion and started chanting "Hari! Hari!"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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