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श्लोक 3.7.25  |
এই শ্লোক পডি’ প্রভু প্রেম-বৃষ্টি করি’
নিত্যানন্দ প্রদক্ষিণ করে গৌরহরি |
एइ श्लोक पडि’ प्रभु प्रेम-वृष्टि करि’
नित्यानन्द प्रदक्षिण करे गौरहरि |
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| अनुवाद |
| गौरहरि ने इस श्लोक का पाठ करते हुए तथा नित्यानंद की परिक्रमा करते हुए भगवान के प्रति आनंदित प्रेम की वर्षा की। |
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| Gaurahari, reciting this verse and circumambulating Nityananda, showered blissful love upon the Lord. |
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