श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.7.24 
“মদিরা যবনী যদি ধরে নিত্যানন্দ
তথাপি ব্রহ্মার বন্দ্য”,—বলে গৌরচন্দ্র
“मदिरा यवनी यदि धरे नित्यानन्द
तथापि ब्रह्मार वन्द्य”,—बले गौरचन्द्र
 
 
अनुवाद
गौरचन्द्र ने कहा, "यदि नित्यानंद शराब की दुकान में प्रवेश करते हैं या किसी बहिष्कृत स्त्री का हाथ स्वीकार करते हैं, तब भी वे ब्रह्मा द्वारा पूजनीय हैं।"
 
Gaurachandra said, "Even if Nityananda enters a liquor shop or accepts the hand of an outcast woman, he is still worshipable by Brahma."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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