श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.7.23 
গৃহ্ণীযাদ্ যবনী-পাণিṁ বিশেদ্ বাশৌণ্ডিকালযম্
তথাপি ব্রহ্মণো বন্দ্যṁ নিত্যানন্দ-পদাম্বুজম্
गृह्णीयाद् यवनी-पाणिꣳ विशेद् वाशौण्डिकालयम्
तथापि ब्रह्मणो वन्द्यꣳ नित्यानन्द-पदाम्बुजम्
 
 
अनुवाद
“श्री नित्यानन्द चाहे किसी बहिष्कृत स्त्री का हाथ स्वीकार करें या शराब की दुकान में प्रवेश करें, उनके चरण कमल ब्रह्मा द्वारा भी पूज्य हैं।”
 
“Whether Sri Nityananda accepts the hand of an outcast woman or enters a liquor shop, his lotus feet are worshipped even by Brahma.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)