श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.7.18 
নিত্যানন্দ-বিজয জানিযা গৌরচন্দ্র
একেশ্বর আইলেন ছাডি’ ভক্ত-বৃন্দ
नित्यानन्द-विजय जानिया गौरचन्द्र
एकेश्वर आइलेन छाडि’ भक्त-वृन्द
 
 
अनुवाद
यह समझकर कि नित्यानंद आ गए हैं, श्री गौरचन्द्र अपने भक्तों को छोड़कर अकेले ही वहाँ चले गए।
 
Thinking that Nityananda had arrived, Sri Gaurachandra left his devotees and went there alone.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)