श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.7.17 
আসিযা রহিলা এক পুষ্পের উদ্যানে
কে বুঝে তাঙ্হার ইচ্ছাশ্রী-চৈতন্য বিনে
आसिया रहिला एक पुष्पेर उद्याने
के बुझे ताङ्हार इच्छाश्री-चैतन्य विने
 
 
अनुवाद
नित्यानंद एक पुष्प वाटिका में आकर ठहरे। श्री चैतन्य के अलावा उनकी इच्छा को कौन समझ सकता है?
 
Nityananda came and stayed in a flower garden. Who but Sri Chaitanya could understand his desire?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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