श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ  »  श्लोक 164
 
 
श्लोक  3.7.164 
তিন-জন একত্র থাকেন নিরন্তর
শ্রী-কৃষ্ণ-চৈতন্য, নিত্যানন্দ, গদাধর
तिन-जन एकत्र थाकेन निरन्तर
श्री-कृष्ण-चैतन्य, नित्यानन्द, गदाधर
 
 
अनुवाद
नीलकाल में ये तीनों - श्री कृष्ण चैतन्य, नित्यानंद और गदाधर - सदैव एक साथ रहते थे।
 
In Nilakal, these three – Sri Krishna Chaitanya, Nityananda and Gadadhara – always lived together.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd