श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ  »  श्लोक 162
 
 
श्लोक  3.7.162 
নিত্যানন্দ-স্বরূপো যাহারে প্রীত মনে
লওযাযেন গদাধর জানে সে-ই জনে
नित्यानन्द-स्वरूपो याहारे प्रीत मने
लओयायेन गदाधर जाने से-इ जने
 
 
अनुवाद
और जो कोई नित्यानंद को प्रसन्न करता है, वह श्री गदाधर को जान सकता है।
 
And whoever pleases Nityananda can know Sri Gadadhara.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)