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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ
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श्लोक 158
श्लोक
3.7.158
এ-তিন-জনের প্রীতি এ-তিনে সে জানে
গৌরচন্দ্র ঝাট না কহেন কারো স্থানে
ए-तिन-जनेर प्रीति ए-तिने से जाने
गौरचन्द्र झाट ना कहेन कारो स्थाने
अनुवाद
इन तीनों के बीच का स्नेह केवल उन्हें ही ज्ञात है। गौरचंद्र आमतौर पर किसी और से इस बारे में चर्चा नहीं करते।
The affection between the three is known only to them, and Gaurchandra usually does not discuss it with anyone else.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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