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श्लोक 3.7.147  |
কৃপা-বাক্য শুনি’ নিত্যানন্দ, গদাধর
মগ্ন হৈলেন সুখ-সাগর-ভিতর |
कृपा-वाक्य शुनि’ नित्यानन्द, गदाधर
मग्न हैलेन सुख-सागर-भितर |
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| अनुवाद |
| जब नित्यानन्द और गदाधर ने भगवान् का यह करुणामय वचन सुना, तो वे दोनों आनन्द के सागर में डूब गये। |
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| When Nityananda and Gadadhara heard these compassionate words of the Lord, they both were immersed in an ocean of joy. |
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