श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ  »  श्लोक 147
 
 
श्लोक  3.7.147 
কৃপা-বাক্য শুনি’ নিত্যানন্দ, গদাধর
মগ্ন হৈলেন সুখ-সাগর-ভিতর
कृपा-वाक्य शुनि’ नित्यानन्द, गदाधर
मग्न हैलेन सुख-सागर-भितर
 
 
अनुवाद
जब नित्यानन्द और गदाधर ने भगवान् का यह करुणामय वचन सुना, तो वे दोनों आनन्द के सागर में डूब गये।
 
When Nityananda and Gadadhara heard these compassionate words of the Lord, they both were immersed in an ocean of joy.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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