vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ
»
श्लोक 142
श्लोक
3.7.142
প্রসন্ন শ্রী-মুখে ’হরে কৃষ্ণ কৃষ্ণ’ বলি’
বিজয হৈলা গৌরচন্দ্র কুতূহলী
प्रसन्न श्री-मुखे ’हरे कृष्ण कृष्ण’ बलि’
विजय हैला गौरचन्द्र कुतूहली
अनुवाद
जब वे आये तो गौरचन्द्र आनन्दपूर्वक हरे कृष्ण महामंत्र का जप कर रहे थे।
When he arrived, Gaurachandra was joyfully chanting the Hare Krishna Mahamantra.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×