श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ  »  श्लोक 131
 
 
श्लोक  3.7.131 
“গদাধর, এ তণ্ডুল করিযা রন্ধন
শ্রী-গোপীনাথেরে দিযা করিবা ভোজন”
“गदाधर, ए तण्डुल करिया रन्धन
श्री-गोपीनाथेरे दिया करिबा भोजन”
 
 
अनुवाद
उन्होंने कहा, "हे गदाधर, इस चावल को पकाओ और गोपीनाथ को अर्पित करने के बाद इसे खा लो।"
 
He said, "O Gadadhara, cook this rice and eat it after offering it to Gopinath."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)