श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ  »  श्लोक 127
 
 
श्लोक  3.7.127 
তবে গদাধর-দেব নিত্যানন্দ-প্রতি
নিমন্ত্রণ করিলেন—“আজি ভিক্ষা ইথি”
तबे गदाधर-देव नित्यानन्द-प्रति
निमन्त्रण करिलेन—“आजि भिक्षा इथि”
 
 
अनुवाद
तब गदाधर ने नित्यानंद से कहा, “आज आप यहीं भोजन करें।”
 
Then Gadadhara said to Nityananda, “Please eat here today.”
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