श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ  »  श्लोक 126
 
 
श्लोक  3.7.126 
তবে দুই-প্রভু স্থির হৈ’ এক-স্থানে
বসিলেন চৈতন্য-মঙ্গল-সঙ্কীর্তনে
तबे दुइ-प्रभु स्थिर है’ एक-स्थाने
वसिलेन चैतन्य-मङ्गल-सङ्कीर्तने
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् दोनों प्रभु शांत हो गये और भगवान चैतन्य के मंगलमय संकीर्तन में संलग्न हो गये।
 
Thereafter both the Lords calmed down and engaged in the auspicious chanting of Lord Chaitanya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)