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श्लोक 3.7.113  |
নিত্যানন্দ-গদাধরে যে প্রীতি অন্তরে
তাহা কহিবারে শক্তি ঈশ্বরে সে ধরে |
नित्यानन्द-गदाधरे ये प्रीति अन्तरे
ताहा कहिबारे शक्ति ईश्वरे से धरे |
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| अनुवाद |
| नित्यानन्द और गदाधर के बीच के दिव्य स्नेह का वर्णन केवल परमेश्र्वर ही कर सकते हैं। |
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| Only the Supreme Lord can describe the transcendental affection between Nityananda and Gadadhara. |
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