श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  3.7.113 
নিত্যানন্দ-গদাধরে যে প্রীতি অন্তরে
তাহা কহিবারে শক্তি ঈশ্বরে সে ধরে
नित्यानन्द-गदाधरे ये प्रीति अन्तरे
ताहा कहिबारे शक्ति ईश्वरे से धरे
 
 
अनुवाद
नित्यानन्द और गदाधर के बीच के दिव्य स्नेह का वर्णन केवल परमेश्र्वर ही कर सकते हैं।
 
Only the Supreme Lord can describe the transcendental affection between Nityananda and Gadadhara.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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