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श्लोक 3.7.112  |
তবে জগন্নাথ হেরি’ হর্ষ সর্ব-গণে
আনন্দে চলিলা গদাধর-দরশনে |
तबे जगन्नाथ हेरि’ हर्ष सर्व-गणे
आनन्दे चलिला गदाधर-दरशने |
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| अनुवाद |
| भगवान जगन्नाथ और उनके सेवकों को देखकर भगवान नित्यानंद प्रसन्नतापूर्वक गदाधर पंडित से मिलने गए। |
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| Seeing Lord Jagannatha and His servants, Lord Nityananda happily went to meet Gadadhara Pandita. |
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