श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  3.7.105 
জগন্নাথ দেখি’ মাত্র নিত্যানন্দ-রায
আনন্দে বিহ্বল হৈ’ গডাগডি’ যায
जगन्नाथ देखि’ मात्र नित्यानन्द-राय
आनन्दे विह्वल है’ गडागडि’ याय
 
 
अनुवाद
जब भगवान नित्यानंद ने भगवान जगन्नाथ को देखा, तो वे आनंद से अभिभूत हो गए और जमीन पर लोटने लगे।
 
When Lord Nityananda saw Lord Jagannatha, he was overwhelmed with joy and began rolling on the ground.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)