श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 6: श्री नित्यानंद प्रभु की महिमा  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  3.6.98 
’মোর ভক্ত না পূজে, আমারে পূজে মাত্র
সে দাম্ভিক, নহে মোর প্রসাদের পাত্র’
’मोर भक्त ना पूजे, आमारे पूजे मात्र
से दाम्भिक, नहे मोर प्रसादेर पात्र’
 
 
अनुवाद
"जो केवल मेरी पूजा करता है, परन्तु मेरे भक्त की पूजा नहीं करता, वह अभिमानी है। वह मेरी दया का पात्र नहीं है।"
 
"He who worships only Me, but does not worship My devotee, is arrogant. He is not worthy of My mercy."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)