vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 6: श्री नित्यानंद प्रभु की महिमा
»
श्लोक 80
श्लोक
3.6.80
দৈবে ব্রহ্মা কামশরে হৈলা মোহিত
লজ্জা ছাডি’ কন্যা-প্রতি করিলেন চিত
दैवे ब्रह्मा कामशरे हैला मोहित
लज्जा छाडि’ कन्या-प्रति करिलेन चित
अनुवाद
"एक बार ब्रह्माजी कामदेव के बाण से मोहित हो गए। उन्होंने सारी लज्जा त्याग दी और अपनी पुत्री के साथ भोग करने की इच्छा की।
"Once Brahma was captivated by the arrow of Cupid. He abandoned all modesty and desired to enjoy the company of his daughter.
तात्पर्य
श्रीमद्भागवतम 3.12.28 देखें।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×