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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 6: श्री नित्यानंद प्रभु की महिमा
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श्लोक 60
श्लोक
3.6.60
অতএব শত্রু-মিত্র নাহিক তোমাতে
বেদে ও কহেন, ইহা দেখি ও সাক্ষাতে
अतएव शत्रु-मित्र नाहिक तोमाते
वेदे ओ कहेन, इहा देखि ओ साक्षाते
अनुवाद
"इसलिए आपका न कोई मित्र है, न कोई शत्रु। यह वेदों का कथन है, और यह मैंने स्वयं देखा है।"
"Therefore you have neither friend nor enemy. This is what the Vedas say, and I have seen it myself."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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