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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 6: श्री नित्यानंद प्रभु की महिमा
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श्लोक 41
श्लोक
3.6.41
আজ্ঞায শিশুর সর্ব কর্ম ঘুচাইযা
যমালয হৈতে পুত্র দিলেন আনিযা
आज्ञाय शिशुर सर्व कर्म घुचाइया
यमालय हैते पुत्र दिलेन आनिया
अनुवाद
"उनके आदेश पर बालक को उसके कर्मों के फल से मुक्ति मिल गई। फिर वे बालक को यमराज के घर से लाकर अपने गुरु के पास लौटा लाए।"
"On his orders, the boy was freed from the consequences of his actions. He then brought the boy from Yamaraja's house and returned him to his guru."
तात्पर्य
देखे 10.45.30-46 श्रीमद भागवतम्।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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