श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 6: श्री नित्यानंद प्रभु की महिमा  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.6.23 
যদি মোরে ’ভৃত্য’ হেন জ্ঞান থাকে মনে
কি মর্ম ইহার? প্রভু, কহ শ্রী-বদনে”
यदि मोरे ’भृत्य’ हेन ज्ञान थाके मने
कि मर्म इहार? प्रभु, कह श्री-वदने”
 
 
अनुवाद
“हे प्रभु, यदि आप मुझे अपना सेवक मानते हैं, तो कृपया इस रहस्य को समझाइए।”
 
“O Lord, if you consider me your servant, please explain this mystery.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)