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श्लोक 3.6.16  |
নবদ্বীপে গিযা নিত্যানন্দ-অবধূত
কিছু ত’ না বুঝোঙ্ মুঞি করেন কি-রূপ |
नवद्वीपे गिया नित्यानन्द-अवधूत
किछु त’ ना बुझोङ् मुञि करेन कि-रूप |
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| अनुवाद |
| “मैं कुछ भी नहीं समझ पा रहा हूँ कि नित्यानंद अवधूत नवद्वीप में क्या कर रहे हैं। |
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| “I cannot understand what Nityananda Avadhoota is doing in Navadvipa. |
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