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श्लोक 3.6.115  |
নিত্যানন্দ-স্বরূপ—পরম অধিকার্
ঈঅল্প ভাগ্যে তাহানে জানিতে নাহি পারি |
नित्यानन्द-स्वरूप—परम अधिकार्
ईअल्प भाग्ये ताहाने जानिते नाहि पारि |
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| अनुवाद |
| “नित्यानन्द स्वरूप परम योग्य हैं, फिर भी अल्प भाग्यशाली लोग उन्हें नहीं समझ सकते। |
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| “Nityananda Swarupa is supremely worthy, yet those less fortunate cannot understand Him. |
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