श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 99
 
 
श्लोक  3.5.99 
পাণিহাটী-গ্রামে হৈল পরম আনন্দ
আপনে সাক্ষাত্ যথা প্রভু গৌরচন্দ্র
पाणिहाटी-ग्रामे हैल परम आनन्द
आपने साक्षात् यथा प्रभु गौरचन्द्र
 
 
अनुवाद
पाणिहाटी गांव परमानंद से भर गया, क्योंकि भगवान गौरचन्द्र स्वयं वहां उपस्थित थे।
 
Panihati village was filled with ecstasy, as Lord Gaurachandra himself was present there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)