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श्लोक 3.5.93  |
প্রভুর পরম প্রিয—গদাধর দাস
ভক্তি-সুখে পূর্ণ যাঙ্র বিগ্রহ-প্রকাশ |
प्रभुर परम प्रिय—गदाधर दास
भक्ति-सुखे पूर्ण याङ्र विग्रह-प्रकाश |
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| अनुवाद |
| गदाधरदास भगवान को अत्यंत प्रिय थे। उनका शरीर भक्ति के आनंद से भरा हुआ था। |
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| Gadadharadas was very dear to the Lord. His body was filled with the bliss of devotion. |
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