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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 92
श्लोक
3.5.92
রাঘব-মন্দিরে শুনি’ শ্রী-গৌরসুন্দর
গদাধর-দাস ধাই’ আইলা সত্বর
राघव-मन्दिरे शुनि’ श्री-गौरसुन्दर
गदाधर-दास धाइ’ आइला सत्वर
अनुवाद
जैसे ही गदाधर दास को पता चला कि श्री गौरसुन्दर राघव के घर पर हैं, वे तुरन्त वहाँ आ गये।
As soon as Gadadhara Das came to know that Sri Gaurasundara was at Raghava's house, he immediately came there.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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