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श्लोक 3.5.9  |
গৌরাঙ্গ-সুন্দর শ্রীবাসেরে করি’ কোলে
সিঞ্চিলেন অঙ্গ তান প্রেমানন্দ-জলে |
गौराङ्ग-सुन्दर श्रीवासेरे करि’ कोले
सिञ्चिलेन अङ्ग तान प्रेमानन्द-जले |
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| अनुवाद |
| गौरसुन्दर ने श्रीवास को गले लगा लिया और उनके शरीर को प्रेमाश्रुओं से भिगो दिया। |
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| Gaurasundara embraced Srivasa and drenched his body with tears of love. |
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