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श्लोक 3.5.81  |
রাঘবের ভক্তি দেখি’ শ্রী-বৈকুণ্ঠ-নাথ
রাঘবেরে করিলেন শুভ-দৃষ্টি-পাত |
राघवेर भक्ति देखि’ श्री-वैकुण्ठ-नाथ
राघवेरे करिलेन शुभ-दृष्टि-पात |
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| अनुवाद |
| जब वैकुंठ के भगवान ने राघव की भक्ति देखी, तो उन्होंने राघव पर दया की दृष्टि डाली। |
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| When the Lord of Vaikuntha saw Raghava's devotion, he looked upon Raghava with pity. |
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