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श्लोक 3.5.758  |
অদ্যাপিহ বৈষ্ণব-মণ্ডলে যাঙ্র ধ্বনি
’চৈতন্যের অবশেষ-পাত্র নারাযণী’ |
अद्यापिह वैष्णव-मण्डले याङ्र ध्वनि
’चैतन्येर अवशेष-पात्र नारायणी’ |
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| अनुवाद |
| आज भी वैष्णव भगवान चैतन्य के अवशेषों के प्राप्तकर्ता के रूप में नारायणी की महिमा करते हैं। |
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| Even today Vaishnavas glorify Narayani as the recipient of the relics of Lord Chaitanya. |
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