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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 756
श्लोक
3.5.756
কিছু-মাত্র আমি লিখিলাঙ জানি’ যাঙ্রে
সকল বিদিত হৈব বেদব্যাস-দ্বারে
किछु-मात्र आमि लिखिलाङ जानि’ याङ्रे
सकल विदित हैब वेदव्यास-द्वारे
अनुवाद
मैंने केवल उन्हीं का उल्लेख किया है जिन्हें मैं जानता हूँ। अन्य का वर्णन वेदव्यास करेंगे।
I have mentioned only those that I know. The others will be described by Ved Vyasa.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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