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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 753
श्लोक
3.5.753
যত ভৃত্য নিত্যানন্দ-চন্দ্রের সহিতে
শত-বত্সরে ও তাহা না পারি লিখিতে
यत भृत्य नित्यानन्द-चन्द्रेर सहिते
शत-वत्सरे ओ ताहा ना पारि लिखिते
अनुवाद
मैं सौ वर्षों में भी नित्यानंद चन्द्र के सभी सेवकों के बारे में लिखने में असमर्थ हूँ।
I am unable to write about all the servants of Nityananda Chandra even in a hundred years.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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