श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 750
 
 
श्लोक  3.5.750 
গাযন মাধবানন্দ-ঘোষ মহাশয
বাসুদেব-ঘোষ—অতি প্রেম-রস-ময
गायन माधवानन्द-घोष महाशय
वासुदेव-घोष—अति प्रेम-रस-मय
 
 
अनुवाद
माधवानंद घोष महाशय एक गायक थे। वासुदेव घोष परमानंद प्रेम की मधुरता से परिपूर्ण थे।
 
Madhavananda Ghosh was a singer. Vasudev Ghosh was full of the sweetness of ecstatic love.
तात्पर्य
माधव घोष के वर्णन के लिए, चैतन्य-चरितामृत, आदि-लीला, अध्याय ग्यारह, पाठ 15 और उसके अनुभाष्य कमेंट्री देखें।

वासुदेव घोष के वर्णन के लिए, चैतन्य-चरितामृत, आदि-लीला, अध्याय ग्यारह, पाठ 15 और उसके अनुभाष्य कमेंट्री देखें।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)