श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 748
 
 
श्लोक  3.5.748 
বডগাছি-নিবাসী সুকৃতি কৃষ্ণদাস
যাঙ্হার মন্দিরে নিত্যানন্দের বিলাস
बडगाछि-निवासी सुकृति कृष्णदास
याङ्हार मन्दिरे नित्यानन्देर विलास
 
 
अनुवाद
भाग्यवान कृष्णदास बड़गाछी के निवासी थे। नित्यानंद उनके घर में लीलाओं का आनंद लेते थे।
 
The fortunate Krishnadas lived in Baragachhi. Nityananda enjoyed pastimes in his house.
तात्पर्य
बड़गांछी के निवासी कृष्णदास के वर्णन के लिए चैतन्य-चरितामृत, आदि-लीला, अध्याय ग्यारह, श्लोक २३ तथा उस पर अनुभाष्य टीका देखें।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)