श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 747
 
 
श्लोक  3.5.747 
প্রসিদ্ধ পরমানন্দ-গুপ্ত মহাশয
পূর্বে যাঙ্র ঘরে নিত্যানন্দের আলয
प्रसिद्ध परमानन्द-गुप्त महाशय
पूर्वे याङ्र घरे नित्यानन्देर आलय
 
 
अनुवाद
परमानंद गुप्त महाशय बहुत प्रसिद्ध थे। नित्यानंद उनके घर में लीलाओं का आनंद लेते थे।
 
Paramananda Gupta Mahasaya was very famous. Nityananda used to enjoy pastimes in his house.
तात्पर्य
परमानंद गुप्त के वर्णन के लिए चैतन्य-चरितामृत, आदि-लीला, अध्याय ग्यारह, पाठ 45 और उस पर अनुभाष्य टिप्पणी देखें।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)