श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 727
 
 
श्लोक  3.5.727 
প্রেম-ভক্তি-রসময গদাধর-দাস
যাঙ্র দরশন-মাত্র সর্ব-পাপ-নাশ
प्रेम-भक्ति-रसमय गदाधर-दास
याङ्र दरशन-मात्र सर्व-पाप-नाश
 
 
अनुवाद
गदाधर दास परमानंद प्रेम की दिव्य रसधारा से भर गए। उनके दर्शन मात्र से ही समस्त पाप नष्ट हो गए।
 
Gadadhara Das was filled with a divine flow of ecstatic love. Just seeing him destroyed all sins.
तात्पर्य
गदाधर दास के विवरण हेतु देखिए चैतन्य चरितामृता आदी लीला अध्याय दस पाठ 53 और उस पर की गयी अनुभाष्य टीका।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)