श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 723
 
 
श्लोक  3.5.723 
যাঙ্র বাক্য কেহ ঝাট না পারে বুঝিতে
নিরবধি নিত্যানন্দ যাঙ্র হৃদযেতে
याङ्र वाक्य केह झाट ना पारे बुझिते
निरवधि नित्यानन्द याङ्र हृदयेते
 
 
अनुवाद
उनके शब्दों को कोई आसानी से नहीं समझ सकता था। नित्यानंद सदैव उनके हृदय में निवास करते थे।
 
His words were not easily understood. Nityananda always resided in his heart.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)