श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 721
 
 
श्लोक  3.5.721 
নিত্যানন্দ-স্বরূপের নিষেধ লাগিযাপূর্ব-
নাম না লিখিল বিদিত করিযা
नित्यानन्द-स्वरूपेर निषेध लागियापूर्व-
नाम ना लिखिल विदित करिया
 
 
अनुवाद
नित्यानंद स्वरूप द्वारा निषिद्ध होने के कारण, मैं उनके पूर्व नामों का खुलासा नहीं कर रहा हूँ।
 
Due to prohibition by Nityananda Swarup, I am not disclosing their previous names.
तात्पर्य
श्री नित्यानंद ने अपने भक्तों को सार्वजनिक रूप से उन नामों पर चर्चा करने से मना किया जिनके द्वारा उनके सहयोगी और साथी कृष्ण के काल में जाने जाते थे। लेकिन भक्तों की जानकारी के लिए, जिन नामों से श्री नित्यानंद के सहयोगी गौरा के काल में जाने जाते थे, उन नामों का वर्णन श्री कवि-कर्णपूर ने श्री गौर-गणोद्देश-दीपिका पुस्तक में किया है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)