श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 717
 
 
श्लोक  3.5.717 
পাইযা অভয স্বামী প্রভু নিত্যানন্দ
নিরবধি কৌতুকে থাকেন ভক্ত-বৃন্দ
पाइया अभय स्वामी प्रभु नित्यानन्द
निरवधि कौतुके थाकेन भक्त-वृन्द
 
 
अनुवाद
अपने निर्भय गुरु नित्यानंद प्रभु को पाकर भक्तजन सदैव आनंदित रहते थे।
 
The devotees were always happy to have their fearless Guru Nityananda Prabhu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)