vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
»
श्लोक 717
श्लोक
3.5.717
পাইযা অভয স্বামী প্রভু নিত্যানন্দ
নিরবধি কৌতুকে থাকেন ভক্ত-বৃন্দ
पाइया अभय स्वामी प्रभु नित्यानन्द
निरवधि कौतुके थाकेन भक्त-वृन्द
अनुवाद
अपने निर्भय गुरु नित्यानंद प्रभु को पाकर भक्तजन सदैव आनंदित रहते थे।
The devotees were always happy to have their fearless Guru Nityananda Prabhu.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×