श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 715
 
 
श्लोक  3.5.715 
নিরবধি সবার শরীরে কৃষ্ণ-ভাব
অশ্রু-কম্প-পুলক—যতেক অনুরাগ
निरवधि सबार शरीरे कृष्ण-भाव
अश्रु-कम्प-पुलक—यतेक अनुराग
 
 
अनुवाद
उनके शरीर सदैव कृष्णभावनामृत के आनंद से भरे रहते थे और उनमें शुद्ध भक्ति के लक्षण प्रकट होते थे, जैसे रोना, काँपना तथा रोंगटे खड़े हो जाना।
 
Their bodies were always filled with the bliss of Krishna consciousness and they displayed symptoms of pure devotion, such as crying, trembling, and goosebumps.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)