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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 708
श्लोक
3.5.708
তবে নিত্যানন্দ সর্ব পারিষদ-সঙ্গে
প্রতি-গ্রামে গ্রামে ভ্রমে কীর্তনের রঙ্গে
तबे नित्यानन्द सर्व पारिषद-सङ्गे
प्रति-ग्रामे ग्रामे भ्रमे कीर्तनेर रङ्गे
अनुवाद
तत्पश्चात् नित्यानंद अपने सहयोगियों के साथ गांव-गांव जाकर आनंदमय कीर्तन करने लगे।
After that, Nityananda along with his colleagues started going from village to village performing joyful kirtans.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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