श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 707
 
 
श्लोक  3.5.707 
হেন-মতে নিত্যানন্দ পরম-কৌতুকে
বিহরেন অভয-পরমানন্দ-সুখে
हेन-मते नित्यानन्द परम-कौतुके
विहरेन अभय-परमानन्द-सुखे
 
 
अनुवाद
इस प्रकार नित्यानंद ने निर्भयतापूर्वक और प्रसन्नतापूर्वक अपनी लीलाओं का आनंद लिया।
 
Thus Nityananda fearlessly and happily enjoyed his pastimes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)