श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 701
 
 
श्लोक  3.5.701 
যে ব্রাহ্মণ নিত্যানন্দ-স্বরূপ না মানে
তাহারে লওযায সেই চোর-দস্যু-গণে
ये ब्राह्मण नित्यानन्द-स्वरूप ना माने
ताहारे लओयाय सेइ चोर-दस्यु-गणे
 
 
अनुवाद
जो ब्राह्मण नित्यानन्द स्वरूप को स्वीकार नहीं करता, वह चोरों और दुष्टों में गिना जाता है।
 
The Brahmin who does not accept the Nityananda form is counted among thieves and evil people.
तात्पर्य
यदि विनम्रता और ज्ञान से संपन्न श्रेष्ठ ब्राह्मण भी श्री नित्यानंद स्वरूप के अधीनता स्वीकार नहीं करते हैं, तो वह मूर्ख ब्राह्मण ठगों और चोरों द्वारा अपने एक के रूप में स्वागत किया जाता है, या श्री नित्यानंद उन्हें ठगों और चोरों की श्रेणी में शामिल करते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)